सफ़र
उनका सफ़र
तीन दशकों से ज़्यादा समय से दीन की राह में निकलना राशिद अज़ीम की ज़िंदगी का नियमित हिस्सा रहा है।
तब्लीग़ी जमात के साथ 32 बार चार महीने के अलावा, वे लगभग 33 वर्षों से हर महीने तीन दिन जमात में लगाते आए हैं। हर बार कुछ समय के लिए घर छोड़ना, साथियों के साथ सादगी से रहना, और तालीम व दावत में वक़्त लगाना इसका हिस्सा रहा।
इन वर्षों में बहुत से अनुभव हुए। ये ज़िंदगी के अलग-अलग दौर से जुड़े हैं, और इन्हें एक साथ नहीं बल्कि ध्यान से लिखा जाना चाहिए।
वर्षों के साथ
ज़िंदगी के अलग-अलग दौर के अनुभव समय के साथ यहाँ दर्ज किए जाएँगे।